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अप्रैल डायरी

जिंदगी की आखिरी शाम तुम रहोगे  मेरे साथ? रहोगे न! हां यही मेरी इच्छा है। मेरे इतना कहते ही तुम कितना तेज हंसे थे, और हंसते हुए ही कहे कि "उहूं जाऊंगा तो मैं ही पहले, तुम रहना साथ मेरे।" बहस के दौरान फिर हमने सोचा मरेंगे एक साथ ,एक दूसरे के हाथों में हाथ लिए। सच कितनी सुखद अनुभूति थी हमारे मन में।  पर क्या ऐसा सम्भव है? रोज किसी न किसी की  मौत हम अपनी आंखों से देख रहे हैं। वो भी तो किसी अपनों की ही है । असहनीय वेदना मन में भर जाता है। कभी कभी सोचती हूँ अगर हममें से कोई एक इस दुनिया से चला जायेगा तो दूसरे के पास जीने की इच्छा क्या रह पायेगी? पर चाहने और ना चाहने से क्या कुछ मिल जाता है, नहीं न! फिर चाहत क्यों बार बार मन में उठने लगता है और मन ही है कि इस चाहत को हकीकत समझ लेता है। मन पर कोई अंकुश नहीं होता और यही अंकुश न होने की वजह से जब मनमुताबिक कुछ नहीं होता तो मन उदासियों के भंवर में डुब जाता है और लगता है जीवन जीने लायक नहीं है। कई बार तो मन होता है जीवन लीला ही खत्म कर ले अपना। वक्त गुजरते जाता है और  मन पर जैसे कोई है जो मरहम लगाते जाता है, जख्म भरने लगता है ।प...

डायरी

तेरी हाथों की लकीरों में मेरी भी लकीर समायी हुई है हाँ मैंने देखा है और महसूस किया है। कुछ तो होता होगा न ,आखिर क्यों और कैसे दो अजनबी एक हो जाते हैं? मुझे याद है  तुम्हारे मैसेज का जवाब मैं बहुत कम देती थी,क्योंकि तब मैं तुम्हें जानती ही कितना थी। एक दिन पता नहीं क्या और कुछ हुआ और हम खूब ढ़ेर सारी बातें करते रहे। बातों के दरम्यान तुम्हारा एक मैसेज मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया की क्या वाकई मेरी चाहत भी तुम हो? दो दिन सोचती रही और अचानक रात दस बजे के करीब मैंने भी तो हौले से स्वीकार किया कि हाँ है न मुझे भी प्यार तुमसे। क्षण भर तुम आश्चर्य चकित हुए। विश्वास और अविश्वास के बीच तुम गहरी सांस लेते रहे और फिर धीरे से कहा, "बाद में बात करें?" खुशी के पल ,जिसमें शायद हम कुछ देर अकेले रहना चाहते हैं, उससे भी जिसके कारण हम खुश हैं।  बातें थमने का नाम नहीं ले रही थी, कई रातें हमने जागते हुए गुजारे और तब हमने मिलने का मन बनाया। हम मिले ।तुम घबराये हुए थे और मैं बिल्कुल सहज,जैसे सदियों से हमारी पहचान हो। तुम्हारी घबराहट का राज जानकर मुझे बहुत हँसी आई। तुम सोचकर परेशान थे कि मैं तुम्हे एक...

स्वयंसिद्धा

बहुत दिनो बाद  शब्द रखने का साहस जुटाया है  जानती हूँ ...खुद की हैसियत  इसीलिए भीङ को अपना बनाया है । तुमने जिसे भेङ समझा  वही मेरी बुनियाद है  गर तालियाँ बजाने मे माहिर हूँ   गाल बजाना मे ..मै ही कामयाब हूँ  बेशक ....नामांकित न हो पाऊंगी इतिहास के किसी पन्ने पर  तदापि घास की भांति फिर फिर उग आऊंगी मिटटी पर  कितनी मर्तबा मुझे मिटा लो रहूंगी #कालजयी  स्वयंसिद्धा 

I Wish

Sometimes when I am all alone and feeling blue. My thoughts keep drifting back to you I wonder will I be ever able to love you In this world …..Just the way I want to My dreams come and hold my hand And they take me to a far away land My soul flies away to a special place Beyond the sun, the stars and space This is a place so very special to me Because it is just you and me here I see This is where I love you without fear Where only your heart beats I can hear This is where there is no sadness to feel  Where all wounds will heal This is where our hearts are chained no more Where our souls have wings to fly and soar This is where I clearly hear your soft whispers into my ear, And I can tell you all the beautiful things you want to hear. I wish I could release my soul from deep within… I wish I could live next to you as your second skin I wish my dream would go on and on with such clarity I wish we could get to stay in this place till eternity ©   ╰ღ╮❤╭ღ╯

बेमतलब ख्याल

कहने को रात है, पर यह भी दिन की तरह ही शांत है। आसमान कुछ ज्यादा साफ है, इसलिये वो तारें भी दिखने लगे हैं जो इस शहर में नहीं दिखे कभी। झींगुर की आवाज़ मन को भा रही है। कुछ तो है जो सन्नाटों को तोड़ रहा है। हवा अपनी रफ्तार से चल रही है, और ख्याल हवा से तेज़! मन में कुछ अजीब सी उलझनें चल रही हैं। कभी कभी सब उलझा सा लगता है, तो कभी लगता है यह उलझन भी जरूरी है...वरना इतना साफ देखने का प्रयत्न नहीं किया जाता। चांद को देखने की कोशिश में हूँ....उसके न दिखने पर जो मायूसी आई थी वो यह सोच कर फुर् हो गई कि वो भी तो अपने नियत समय पर आएगा । शायद इसलिये उसका इंतजार है! इंतज़ार भी तभी रह पाता है जब तक कि वो सहज उपलब्ध न हो। और हम दोष चांद को देते है। कुछ उलझी हुई बातें है जो अब सुलझाना भी नहीं चाहती। चांद को चांद ही बने रहना चहिये। जिस दिन वो मिल गया वो बस ढेर सारे गड्डो का एक ग्रह बनकर रह जाएगा। सुंदरता को कुरूपता कहा जाएगा। यही दुनिया है, यही दस्तूर दुनिया के। #बेमतलब_बेमुरव्वत_से_ख्याल

कभी ऐसा हो कि तुम्हें लिखूं कुछ

कभी ऐसा हो कि तुम्हे लिखूँ कुछ... तो ख्याल रखना उसे कभी हड़बड़ाहट में मत पढ़ना, उसे समझना छुट्टी वाला दिन और आराम से लेटे रहना! जो लिखा है उसे देखना फ़ुर्सत वाली चाय समझकर मुस्करा देना उसे महसूस कर  और हौले से सम्भाल लेना! अपने हाथों में  कप को थामते हो जैसे, उन अक्षरों को भी थाम लेना चाय की मिठास और  अदरक की महक सा उन शब्दों को महसूस कर लेना! अपनी छोटी छोटी आँखों को चाहे थोड़ा बन्द रखना पर जब भीगें ये पलकें तो हौले से मुस्कुरा देना! जब खत्म हो जाएं शब्द तो  जवाब मत देना... अपने कंधे को टिका कर दीवार पर आँखों को बन्द कर लेना। आँखों को बन्द रखना  उन्हें हड़बड़ाहट में मत खोलना! मुश्किल से होगा  पर कभी ऐसा हो कि लिख पाऊं कुछ  तो ध्यान रखना उसे हड़बड़ाहट में मत पढ़ना!! _______________________

धर्म

ये किस तरह के धार्मिक लोग हैं, जो जाहिलियत के हदों को पार कर रहे हैं। ऐसे धर्म की कल्पना भी असहनीय है। धार्मिक उन्माद जिसके कारण जीवन-मरण किसी की फिक्र नहीं है। मरने के बाद जो खुशी हूर के रूप में मिलने की बात इनके धर्म में कही गई है, तो क्या इसीलिए जीवन से अधिक महत्वपूर्ण  इनके लिए मौत है?? क्या इनका खुदा यही कहता है कि दूसरे धर्म के लोग इनलोगों के दुश्मन है,इन्हें मारोगे,सताओगे तो तुम्हे जन्नत मिलेगा..! शायद नहीं। मुझे तो ऐसा लग रहा है कि  सिर्फ हमारे प्रधानमंत्री का विरोध ही इनका धर्म बन गया है। नीच हरकत करके सबकी नजर में गिरना शायद इनलोगों को अच्छा लगता है।  जो लोग इनलोगों के सहायता के लिए अपनी जान की बाजी लगा रहे हैं उन्हीं लोगो के साथ अश्लील और घिनौनी हरकत करके पता नहीं किस धर्म की रक्षा कर रहे हैं ये लोग। समाज के लिए, हमारे देश के लिए और पूरे विश्व के लिए ये घातक हैं, इनका बहिष्कार ही हमारी सुरक्षा है। जय हिंद