स्वयंसिद्धा
बहुत दिनो बाद
शब्द रखने का साहस जुटाया है
जानती हूँ ...खुद की हैसियत
इसीलिए भीङ को अपना बनाया है ।
तुमने जिसे भेङ समझा
वही मेरी बुनियाद है
गर तालियाँ बजाने मे माहिर हूँ
गाल बजाना मे ..मै ही कामयाब हूँ
बेशक ....नामांकित न हो पाऊंगी इतिहास के किसी पन्ने पर
तदापि घास की भांति फिर फिर उग आऊंगी मिटटी पर
कितनी मर्तबा मुझे मिटा लो
रहूंगी #कालजयी
स्वयंसिद्धा
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