धर्म

ये किस तरह के धार्मिक लोग हैं, जो जाहिलियत के हदों को पार कर रहे हैं। ऐसे धर्म की कल्पना भी असहनीय है।
धार्मिक उन्माद जिसके कारण जीवन-मरण किसी की फिक्र नहीं है।
मरने के बाद जो खुशी हूर के रूप में मिलने की बात इनके धर्म में कही गई है, तो क्या इसीलिए जीवन से अधिक महत्वपूर्ण  इनके लिए मौत है??
क्या इनका खुदा यही कहता है कि दूसरे धर्म के लोग इनलोगों के दुश्मन है,इन्हें मारोगे,सताओगे तो तुम्हे जन्नत मिलेगा..! शायद नहीं।

मुझे तो ऐसा लग रहा है कि  सिर्फ हमारे प्रधानमंत्री का विरोध ही इनका धर्म बन गया है।
नीच हरकत करके सबकी नजर में गिरना शायद इनलोगों को अच्छा लगता है। 
जो लोग इनलोगों के सहायता के लिए अपनी जान की बाजी लगा रहे हैं उन्हीं लोगो के साथ अश्लील और घिनौनी हरकत करके पता नहीं किस धर्म की रक्षा कर रहे हैं ये लोग।

समाज के लिए, हमारे देश के लिए और पूरे विश्व के लिए ये घातक हैं, इनका बहिष्कार ही हमारी सुरक्षा है।

जय हिंद

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