बेमतलब ख्याल

कहने को रात है, पर यह भी दिन की तरह ही शांत है। आसमान कुछ ज्यादा साफ है, इसलिये वो तारें भी दिखने लगे हैं जो इस शहर में नहीं दिखे कभी।

झींगुर की आवाज़ मन को भा रही है। कुछ तो है जो सन्नाटों को तोड़ रहा है।

हवा अपनी रफ्तार से चल रही है, और ख्याल हवा से तेज़! मन में कुछ अजीब सी उलझनें चल रही हैं। कभी कभी सब उलझा सा लगता है, तो कभी लगता है यह उलझन भी जरूरी है...वरना इतना साफ देखने का प्रयत्न नहीं किया जाता।

चांद को देखने की कोशिश में हूँ....उसके न दिखने पर जो मायूसी आई थी वो यह सोच कर फुर् हो गई कि वो भी तो अपने नियत समय पर आएगा । शायद इसलिये उसका इंतजार है! इंतज़ार भी तभी रह पाता है जब तक कि वो सहज उपलब्ध न हो। और हम दोष चांद को देते है।

कुछ उलझी हुई बातें है जो अब सुलझाना भी नहीं चाहती। चांद को चांद ही बने रहना चहिये। जिस दिन वो मिल गया वो बस ढेर सारे गड्डो का एक ग्रह बनकर रह जाएगा। सुंदरता को कुरूपता कहा जाएगा। यही दुनिया है, यही दस्तूर दुनिया के।

#बेमतलब_बेमुरव्वत_से_ख्याल


Comments